Category: Hindi Shayari

“खड़े हैं इस किनारे”

खड़े हैं इस किनारे, जाना है उस पार किसकी सलाह ली जाये जमा है हमारे इर्द-गिर्द नकाबपोशों की फ़ौज़ सच्चा कौन है ये पहचान कैसे की जाये “ऋतेश”

"हैं ढेरों कश्तियाँ सामने मेरे"

हैं ढेरों कश्तियाँ सामने मेरे समझ नहीं आता किसे साथ लेकर दरिया पार हो जाऊँ या डूब कर दरिया का ही हो जाऊं “ऋतेश””    

"सोचिये आज कैसे ये हालात हैं"

सोचिये आज कैसे ये हालात हैं बदले से सबके खयालात हैं अपनों के लिए वक़्त की कमी है हमे गैरों पे हम इतने मेहरबान हैं “”ऋतेश”