Tag: Hindi poems

“एक अज़नबी”

शहर में मिला था एक अज़नबी मुझसे बोला उसे मालूम है एक नयी छुपी हुई दुनिया तलक जाने का रास्ता वो वाकिफ है एक जादुई सीढ़ी से जो वहाँ तक जाती है रास्ता बहुत आसान है और सफर बहुत छोटा है उसकी बातो में सिर्फ और सिर्फ सच्चाई झलक रही थी और उसकी भूरी आँखों […]

"वो रौबदार मूंछो वाला आदमी"

वो रौबदार मूंछो वाला आदमी बड़ा मायूस है बेटी की विदाई ने उसकी सूखी आँखों को डबा-डब कर दिया है आखिर बड़े ही नाज़ों से पाला था उसे अब दूसरे की उंगली थमा दी है उम्र भर के लिए बेटी कितनी बड़ी हो गई है अब जाके उसे एहसास हुआ नम आँखों से एक बाप […]

"सुबह के ६ बजे दरवाजे पे दस्तक पर"

सुबह के ६ बजे दरवाजे पे दस्तक पर माँ ने दरवाजा खोला कोदई की माँ बर्तन धोने आई थी हम दुबके पड़े थे रजाई की आगोश में भरी शीतलहर में, कोदई की माँ मील चलकर आई थी माँ रोज कहती, अम्मा इतनी ठण्ड में मत आया करो बूढ़े बदन में ठण्ड लग जाएगी, घर पे […]

"सुबह तक रख ले ना आज चाँद को अपने आँचल में"

सुबह तक रख ले ना आज चाँद को अपने आँचल में कल पहली किरण के साथ ही अलविदा कह दूंगा चला जाऊंगा चाँद को साथ लेकर कहीं बहुत दूर, तेरे दिन के उजाले से कल से बस इसके हिस्से में अमावस होगी, वादा करता हूँ देख ना कैसे तड़प रहा है तेरी पनाह पाने को, […]

"ऐसा नहीं है तुझे तुझसे छीन रहा हूँ मैं"

ऐसा नहीं है तुझे तुझसे छीन रहा हूँ मैं ऐ ज़िंदगी, तेरी ज़िंदगी में कुछ नए रंग भर रहा हूँ मैं फिसल गया था कभी ज़माने की अंधी दौड़ में जो तेरी उंगली थामकर आहिस्ता-आहिस्ता फिर से चल रहा हूँ मैं इक लौ जो बुझ गयी थी सीने में पिछली आँधियों में वो आग फिर […]

"पलकों पर ही रखा था"

पलकों पर ही रखा था उसे और उसके ख्वाब को आँखे खोली दोनों फिसल गए वो सदियों के लिए रूठ गया मुझसे मैं और मेरे ख्वाब टूटकर बिखर गए मेरे ही पहलू में “ऋतेश “

"मज़बूर हूँ, आ नहीं सकता तेरी पनाह में "

मज़बूर हूँ, आ नहीं सकता तेरी पनाह में गुस्ताख़ हवा का इक झोंका भेजा है हौले से तुम्हे छू कर गुज़र जायेगा बिखरी हुई जुल्फों को खुद ना सुलझाना उन्हें रहने देना थोड़ी देर, लाल सुर्ख गालों पर, इठलाने देना मैं कल लौटूंगा तो उन्हें कान के पीछे आहिस्ते से लगा दूंगा मज़बूर हूँ, आ […]

"तेरी मीठी रातों से इक रात चुराने आया हूँ"

तेरी मीठी रातों से इक रात चुराने आया हूँ तेरी नीली आँखों से कुछ ख्वाब चुराने आया हूँ ना दे इल्ज़ाम तू चोरी का, मैं चोर नहीं दीवाना हूँ इस रात की बस औकात मेरी, मैं नन्हा इक परवाना हूँ ले चलूँ तुझे तारों की छाँव, आ चल मैं लेने आया हूँ तेरी मीठी रातों […]